जीव जनन कैसे करते है | science vvi subjective question 2021 | class 10th science important question 2021

10th Science Question

प्रश्न 1. जंतु परागण क्या है?

उत्तर-जंतु परागण में कीट, गिलहरी, चिड़िया, बन्दर व हाथी सहायक होते हैं। परागकण जन्तुओं के पैरों में चिपक जाते हैं तथा दूसरे पुष्पों तथा पहुंच जाते है।


प्रश्न 2 मुकलन क्या है?

उत्तर-शरीर पर एक ऊर्ध्व संरचना बनती है जिसे मुकुल कहते हैं। शरीर का केन्द्रक दो भागों में विभक्त हो जाता है और उनमें से एक केन्द्रक मुकुल पैतृक जीव से अलग होकर वृद्धि करता है और पूर्ण विकसित जीव बन जाता है। जैसे यीस्ट, हाइड्रा तथा ल्यूकोसोलिनिया (स्पंज) आदि ।


प्रश्न 3. एक-कोशिक एवं बहुकोशिक जीवों की जनन पद्धति में क्या अंतर है?

उत्तर-एक कोशिक प्रायः विखंडन मुकुलन, पुनरुद्भवन, बहुखंडन आदि विधियों से जनन करते हैं। उनमें केवल एक ही कोशिका होती है। वे सरलता से कोशिका विभाजन के द्वारा तेजी से जनन कर सकते हैं। बहुकोशिक जीवों में जनन क्रिया जटिल होती है और वह मुख्य रूप से लैंगिक जनन क्रिया ही होती है।


प्रश्न 4.एक-लिंगी और द्वि-लिंगी जीव की परिभाषा एक-एक उदाहरण के साथ दीजिए।

उत्तर-एकलिंगी जीव-जिस जीव में नर और मादा अलग-अलग होते हैं उसे एकलिंगी जीव कहते हैं। उदाहरण-मनुष्य। द्विलिंगी जीव-जिस जीव में नर और मादा दोनों उपस्थित होते हैं उसे द्विलिंगी जीव कहते हैं। उदाहरण-केंचुआ।


प्रश्न 5. कंडोम क्या है?

उत्तर-यह परिवार नियोजन का एक साधन है। पुरुष द्वारा इसका उपयोग करने से शुक्राणु मादा के गर्भाशय में नहीं पहुंच पाते जिससे गर्भधारण की कोई सम्भावना नही होती है


प्रश्न 6. गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर-गर्भनिरोधक युक्तियाँ मुख्य रूप से गर्भ रोकने के लिए ही अपनाई जाती हैं। इनसे बच्चों की आयु में अंतर बढ़ाने में भी सहयोग लिया जा सकता है। कंडोम के प्रयोग में यौन संबंधी कुछ रोगों के संक्रमण से भी बचा जा सकता है


प्रश्न 7. जनन कितने प्रकार का होता है?

उत्तर-सजीवों में जनन दो प्रकार से होता है-

(i) अलैंगिक जनन अलैंगिक जनन के लिए नर एवं मादा के जनन अंगों का कोई उपयोग नहीं होता है। अत: एकल जीव प्रायः अलैंगिक जनन ही करते हैं।

(ii) अलैंगिक जनन निम्न प्रकार के होते हैं-(i) विखंडन, (i) मुकुलन, (iii) जीवाणु जनन, (iv) पुनर्जनन तथा (v) कायिक प्रवर्धन।

(ii) लैंगिक जनन-लैंगिक जनन के लिए नर एवं मादा जनन अंगों का पारस्परिक सम्मिलन आवश्यक होता है। अत: इसके लिए किसी जाति के दो व्यक्तियों (एक नर, एक मादा) की आवश्यकता होती है।





प्रश्न 8. जनन किसी स्पीशीज की समष्टि के स्थायित्व में किस प्रकार सहायक है?

उत्तर-किसी भी स्पीशीज की समष्टि के स्थायित्व में जनन और मृत्यु का बराबर का महत्त्व है। यदि जनन और मृत्यु दर में लगभग बराबरी की दर हो तो स्थायित्व बना रहता है। एक समष्टि में जन्म दर और मृत्यु दर ही उसके आधार का निर्धारण करते हैं।


प्रश्न 9. नर तथा मादा जनन हार्मोनों के नाम तथा कार्य लिखें।

उत्तर-नर जनन हार्मोन के नाम टेस्टोस्टेरॉन टेस्टोस्टेरॉन के कार्य-शुक्राणुओं का निर्माण मादा जनन हार्मोन के नाम एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टरॉन एस्ट्रोजन के कार्य-द्वितीय लैंगिक लक्षणों का विकास एवं जनन शक्ति का विकास। प्रोजेस्टरोन के कार्य-भ्रूण के विकास में सहायक, भ्रूण के पोषण में सहायक होते हैं


प्रश्न 10. बीजाणु द्वारा जतन से जीव किस प्रकार लाभान्वित होता है?

उतर-बीजाणु द्वारा जनन से जीव लाभान्वित होता है क्योंकि बीजाणु के चारों ओर एक मोटी भिति होती है,जो प्रतिकूल परिस्थितियों में उसकी रक्षा करती है और नम सतह के संपर्क में आने पर वह वृद्धि करने लगती है।


प्रश्न 11.शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि की क्या भूमिका है?

उत्तर-शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि अपना नाव शुक्र वाहिका में डालते । जिससे शुक्राणु एक तरल माध्यम में आ जाते हैं। इसके कारण इनका स्थानांतरण सरलता से होता है। साथ ही, यह साव उन्हें पोषण भी प्रदान करता है।


प्रश्न 12. DNA प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्व है ?

अथवा, DNA की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक क्यों है?

उत्तर-डी. एन. ए, गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं जो कोशिका के केन्द्रक में उपस्थित होते हैं। ये जनन की विशेष सूचना को धारण करनेवाली प्रोटीन के निर्माण के लिए उत्तरदायी होते हैं। प्रत्येक प्रकार की सूचना के लिए विशिष्ट प्रकार की प्रोटीन उत्तरदायी होती है। डी. एन. ए. के अणुओं में आनुवंशिक गुणों का संदेश होता है जो जनक से संतति पीढ़ी में जाता है।


प्रश्न 13. संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है।

उत्तर-निषेचन प्रक्रम के दौरान शुक्राणु एवं अंडाणु का संलयन होता है। दोनों में समान गुणसूत्र होते हैं। समसूत्रण के समय गुणसूत्रों की संख्या नर और मादा के गुणसूत्रों के साम्मिलन के कारण दुगुनी हो सकती है। परन्तु,अर्धसूत्रण के कारण उनकी यह संख्या आधी हो जाती है। इस प्रकार संततियों में जनको के समान ही गुणसूत्र रहते हैं। इस प्रकार आनुवंशिक योगदान में नर एवं मादा की साझेदारी समान होती है।




प्रश्न 14.माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रूण को पोषण किस प्रकार प्राप्त होता है?

उत्तर-गर्भस्थ भ्रूण को माँ के रुधिर से पोषण प्राप्त होता है। इसके लिए प्लेसेंटा की संरचना प्रक्ति के द्वारा की गई है। यह एक तश्तरीनुमा संरचना है जो गर्भाशय की भित्ति में धंसी होती है। इसमें भ्रूण की ओर से ऊतक के प्रवर्ष होते है। माँ के ऊतकों में रक्त स्थान होते हैं जो प्रवर्ष को ढांपते हैं। ये माँ से भ्रूण को ग्लूकोज, ऑक्सीजन और अन्य पदार्थ प्रदान करते हैं।


प्रश्न 15.क्या आप कुछ कारण सोच सकते हैं जिससे पता चलता हो कि जटिल संरचना वाले जोब पुनरुद्भवन द्वारा नई संतति उत्पन्न नहीं कर सकते ?

उत्तर-जटिल संरचना वाले जीव पुनरुदभवन द्वारा नई संतति उत्पन्न नहीं सकते, क्योंकि अधिकतर बहुकोशिक जीव विभिन्न कोशिकाओं समूह मात्र ही नहीं है। विशेष कार्य हेतु विशिष्ट कोशिकाएं संगठित होकर ऊतक का निर्माण करती तथा ऊतक संगठित होकर अंग बनाते है शरीर में इनकी स्थिति भी निश्चित होती हैं। ऐसी सजग व्यवस्थित परिस्थिति में कोशिका-दर-कोशिका विभाजन अव्ययहारिक होता है


प्रश्न 16. ऋतुसाव क्यों होता है?

उत्तर-यदि नारी शरीर में निषेचन नहीं हो, तो अंड कोशिका लगभग एक दिन तक जीवित रहती है। अंडाशय हर महीने एक अंड का मोचन करता है और निषेचित अंड की प्राप्ति हेतु गर्भाशय भी हर महीने तैयारी करता है। इसलिए,इसकी अंत:मिति मांसल एवं स्पोंजी हो जाती है। यह अंड के निषेचन होने की अवस्था में उसके पोषण के लिए आवश्यक है। लेकिन निषेचन न होने की अवस्था में इस पर्त की भी आवश्यकता नहीं रहती। इसलिए यह पर्त धीरे-धीरे टूटकर योनि मार्ग में रुधिर एवं म्यूकस के रूप में बाहर निकल जाती है। इस वक्र में लगभग एक मास का समय लगता है। इसे ऋतुस्राव अथवा रजोधर्म कहते हैं। इसकी अवधि लगभग 2 से 8 दिनों की होती है।


प्रश्न 17. बाह्य निषेचन तथा आंतरिक निषेचन का क्या अर्थ है? संभोग अंग क्या होते हैं?

उत्तर-बाह्य निषेचन-जब नर तथा मादा युग्मकों का संलयन मादा के शरीर के बाहर होता है तो इस संलयन को बाह्य निषेचन कहते हैं, जैसे-मेंढक में नर तथा मादा दोनों जीव संभोग करते हैं और अपने-अपने युग्मकों को पानी में छोड़ देते हैं, शुक्राणु अंडों को पानी में ही निषेचित करता है। बाह्य निषेचन में अंडाणुओं की आन्तरिक सुरक्षा की अनुपस्थिति के कारण नष्ट होने के अवसर अधिक होते हैं, इसलिये इस बात की निश्चितता के लिए कुछ अण्डाणु निषेचित हो सकें, मादा अधिक अण्डाणु उत्पन्न करती है।

आन्तरिक निषेचन बहुत-से जीवों, जैसे-कुत्ता, बिल्ली, गाय, कीट, मनुष्य, सरीस्प, पक्षी तथा स्तनधारियों आदि में नर अपने शुक्राणुओं को मादा के शरीर के अन्दर छोड़ते हैं। शुक्राणु अंडों को मादा के शरीर के अन्दर ही निषेचित करते हैं। निषेचन को आन्तरिक निषेचन कहते हैं। शुक्राणु (वृषण से) मादा के अण्डाशय से निकले अण्डाणु से संयोग करते हैं। मादा के शरीर में निषेचन होता है। शुक्राणु के स्थानान्तरण का कार्य संभोग कहलाता है। इससे सम्बन्धित अंग संभोग अंग होते हैं।


प्रश्न 18. परागण से लेकर पौधे में बीज बनने तक सभी अवस्थाएँ

उत्तर-परागकोश में परागकण परिपक्व होने के बाद हवा, पानी या कीटों द्वारा स्वीकेसर के वर्तिकान पर पहुँच जाते हैं। इस प्रक्रिया को परागण कहते हैं। परागण के बाद परागकण से एक परागनली निकलती है। परागनली में दो नर युग्मक होते है। इनमें से एक नर युग्मक पराग नली में होता हुआ बीजांड तक पहुँच जाता है। यह बीजाण्ड के साथ संलयन हो जाता है जिससे युग्मनज बनता है। ऐसे संलयन को निषेचन कहते हैं। युग्मनज माइटोटिक विधि द्वारा कई बार विभाजित होता है। निषेचन के बाद फूल के पंखुड़ी, पुंकेसर, वर्तिका तथा वर्तिकाग्र गिर जाते हैं। बाह्य दल सूख जाता और अंडाशय पर लगा रहता है। अंडाशय शीघ्रता से वृद्धि करता है और इसमें स्थित कोशिकायें कई बार विभाजित होकर वृद्धि करती हैं और बीज का बनना आरम्भ हो जाता है। बीज में एक नन्हा पौधा अथवा भ्रूण होता है।




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